गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: देवरीकला सहकारी समिति में ‘फर्जी’ नियुक्ति पर बवाल: पीएमओ तक पहुंची शिकायत, उठी उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
प्रभारी प्रबंधक चंद्रकांत सलाम का इस्तीफा मंजूर, फिर भी कुर्सी पर कब्जा

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, देवरीकला में प्रभारी प्रबंधक की नियुक्ति को लेकर गंभीर अनियमितताओं और नियम-विरुद्ध कामकाज का एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। इस्तीफे के बावजूद दोबारा पद पर असंवैधानिक रूप से बैठाए जाने के इस संदिग्ध मामले की गूंज अब सीधे देश के सर्वोच्च प्रशासनिक कार्यालय यानी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक जा पहुंची है। मामले को लेकर पीएमओ में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए दोषियों पर तत्काल और कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रभारी प्रबंधक चंद्रकांत सलाम का इस्तीफा मंजूर, फिर भी कुर्सी पर कब्जा

पूरा मामला देवरीकला सहकारी समिति के प्रभारी प्रबंधक श्री चंद्रकांत सलाम से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी और शिकायत के अनुसार, श्री चंद्रकांत सलाम द्वारा पूर्व में अपने पद से इस्तीफा दे दिया गया था, जिसे कलेक्टर एवं सहायक पंजीयक (सहकारी संस्थाएं) द्वारा विधिवत स्वीकार भी कर लिया गया था। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस्तीफा मंजूर होने के बावजूद उन्हें आज भी बेधड़क उसी पद पर काम करने दिया जा रहा है, जो कि सीधे तौर पर शासन और कानून की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।
नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया की उड़ाई गईं धज्जियां

इस पूरे मामले में सहकारिता अधिनियमों और विभागीय नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। कायदे से इस्तीफा स्वीकार होने के बाद पद स्वतः रिक्त हो जाता है और नई नियुक्ति के लिए एक तय पारदर्शी प्रक्रिया, समिति का प्रस्ताव और सक्षम प्राधिकारी का अनुमोदन आवश्यक होता है। परंतु देवरीकला समिति में न तो कोई पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई और न ही नियमों का पालन हुआ। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ रसूखदार अधिकारियों और संबंधितों की आपसी सांठगांठ के बल पर ही इस अवैध पुनर्नियुक्ति के खेल को अंजाम दिया गया है।
तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक सुरेश साइमन ने किया मामले का खुलासा

इस पूरे फर्जीवाड़े और विभागीय सांठगांठ की परतें समिति के तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक सुरेश साइमन ने उधेड़ी हैं। उनके द्वारा सामने लाए गए तथ्यों के बाद सहकारी समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरेश साइमन के खुलासे के बाद ही इस पूरे असंवैधानिक खेल का पर्दाफाश हुआ और मामला उच्च अधिकारियों से लेकर पीएमओ की चौखट तक पहुंचा।
पीएमओ से स्वतंत्र एजेंसी द्वारा उच्च स्तरीय जांच की मांग
सहकारी संस्थाओं में जारी इस तरह की खुलेआम मनमानी और फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि इस पूरे फर्जी नियुक्ति कांड की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। इसके साथ ही इस पूरे षड्यंत्र में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों की सांठगांठ को बेनकाब करते हुए उन पर कठोरतम कड़ा कानूनी रुख अपनाया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सहकारिता के तंत्र को अपनी जागीर समझने की भूल न करे।









